--> पन्द्रह अगस्त - कुछ यादें मेरी..कुछ नयी बातें, कुछ पुरानी बातें

पन्द्रह अगस्त - कुछ यादें मेरी..कुछ नयी बातें, कुछ पुरानी बातें


मैंने पहले से तय कर के रखा था कि आज कुछ भी नहीं लिखूंगा ब्लॉग पे..दो दिनों से यही सोच रहा था कि क्या लिखूं पन्द्रह अगस्त पे? लेकिन कुछ नतीजे पे नहीं पहुँच पा रहा था. फिर तय ये किया कि बहुत से और ब्लॉगर कुछ न कुछ विशेष तो जरूर लिखेंगे आज..वही सब पढ़ के आनदं ले लूँगा..वैसे भी मैं कौन सा बड़ा लेखक या ब्लॉगर हूँ. पर उँगली तो सुबह से ही कुलबुलाने लगी थी लैपटॉप के की-बोर्ड से खेलने के लिए. जब बर्दाश्त नहीं हुआ तो लॉग इन कर ही लिया कमबख्त ब्लॉगर डॉट कॉम पे. सोचा कि अच्छा बुरा जो भी हूँ लिखूंगा, कम से कम उँगली का दर्द तो जाएगा.

आज सुबह ५ बजे ही नींद खुल गयी ओर ६ बजे तक नहा-धो के, थोड़ा पूजा पाठ जैसा कुछ कर के तैयार हो गया. मौसम तो मस्त है ही अपने शहर का. धीमी ठंडी हवा खिड़की से आ रही थी. लैपटॉप पे कुछ पुराने गीत बज रहे थे और कमरे में अगरबत्ती की भीनी खुशबू...कोई भी दिन की शुरुआत ऐसे खुशनुमा तरीके से हो तो फिर कहने ही क्या. और उसपर से भी दिन हो सबसे अहम "स्वतंत्रता दिवस का दिन " तो बात कुछ ओर निराली हो जाती है. सभी भारतीयों की तरह पन्द्रह अगस्त मेरे जिंदगी का सबसे अहम दिन है(मैं ये मान के चल रहा हूँ कि सभी देशवासियों का सबसे अहम दिन ये पन्द्रह अगस्त है और अगर कोई भारतीय पन्द्रह अगस्त को अपने जिंदगी सा सबसे अहम दिन मानने से इनकार करता है तो उसे भारतीय कहलाने का कोई हक नहीं, ये मेरी अपनी निजी सोच है, हालत कुछ भी हों देश के, लेकिन ये आज़ादी का पर्व है, और हमें इस दिन को ख़ुशी से मानना चाहिए) . आज के दिन हमारे देशवासियों की ये प्रथा रही है कि देशभक्ति गाना सुनेंगे, देशभक्ति फ़िल्में देखेंगे, फेसबुक ऑरकुट पे "जय हिंद, वंदे मातरम" का स्टेट्स अपडेट करेंगे और अगले ही दिन सब भूल जायेंगे. फिर अगर देशभक्ति याद आई भी तो छब्बीस जनवरी के दिन या पन्द्रह अगस्त के दिन. भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, चन्द्रसेखर आजाद, उधम सिंह,राम प्रसाद बिस्मिल जैसे नाम तो आमतौर पे हम लोग को पन्द्रह अगस्त ओर छब्बीस जनवरी के दिन ही याद आते हैं, बाकी दिन तो हम इन्हें भूले रहते हैं. कुछ नई पीढ़ी के ऐसे भी बालक हैं जिन्हें बाल गंगाधर तिलक, उधम सिंह, बटुकेश्वर दत्त,राम प्रसाद बिस्मिल जैसे महान लोगों के नाम भी पता नहीं होंगे, इसका क्या किया जाये? अभी के बढ़ते चलन ओर वेस्टर्न कल्चर का बढ़ता क्रेज पता नहीं कहाँ ले के जाएगा इस नयी पीढ़ी को. बहुत से नए पीढ़ी के बच्चे ऐसे भी हैं जो वेस्टर्न कल्चर के साथ साथ अपने अंदर के भारतीय को भी जिन्दा रखे हुए हैं, उन्हें देख बेहद खुशी होती है...खैर, बच्चे तो बच्चे हैं, जैसा बड़ों को करता देखेंगे वैसा ही सीखेंगे भी. हम में से बहुत लोग ऐसे हैं जिनकी प्रतिक्रिया पन्द्रह अगस्त के बारे में ये रहती है कि आज तो छुट्टी का दिन है. आराम करना है, मजे करना है....होना ये चाहिए कि पन्द्रह अगस्त को हम एक उत्सव जैसा मनाये. खैर जो भी हो, आप लोग तो फ़िलहाल निश्चिंत रहें, मैं कोई आज़ादी या इन सब बातों पे भाषण नहीं देने वाला. इस विषय पर भाषण बहुत बार दिए जा चुके हैं और बहुत विद्वान लोग बहुत कुछ बोल भी चुके हैं लेकिन असर कितनों पे होता है ये हम सभी जानते हैं. अभी के लिए, कुछ यादें हैं मेरी जो आज बांटना चाहूँगा आप सब के साथ..

जब तक स्कूल में था, तब तक ये एहसास भी रहा कि पन्द्रह अगस्त एक उत्सव है... एक जश्न. दिन भर का स्कूल का कार्यक्रम ओर कागज़ के ठोंगे में मिली जिलेबी,लड्डू ओर बुनिया..साथ में कुछ नमकीन स्नैक्स भी. एक बार की बात है, मैं शायद आठवीं कक्षा में रहा हूँगा. पन्द्रह अगस्त के दिन हम सब बच्चे पंक्ति में खड़े होकर राष्ट्रगान गा रहे थे. अचानक से एक टीचर आयीं मेरे पास ओर प्यार से कहा की राष्ट्रगान गाते वक्त हमेशा फक्र से सर ऊपर रखो. सर नीचे रखना शर्मिंदगी का प्रतीक माना जाता है. उनकी कही वो बात आज भी दिमाग में उतनी ही फ्रेश है और बखूबी याद भी. मेरा सबसे अजीज दोस्त प्रभात, जिसके बारे में आप पिछली पोस्ट में पढ़ चुके हैं....एक आदत सी बन गयी थी मेरी कि हर पन्द्रह अगस्त को प्रभात के घर जाना ओर उसके टेपरिकॉर्डर पे देशभक्ति गीत सुनना. दोस्तों में जब मुझे दिव्या या प्रभात स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें ओर बधाई देते हैं तो लगता है कि सही मायने में किसी ने स्वतंत्रता दिवस की शुभकामना दी है...कुछ ऐसे भी दोस्त हैं जो जब हैप्पी इन्डिपेन्डन्स डे विश करते हैं तो ऐसा लग रहा होता है कि वो फ्रेंडशिप डे या वैलेंटाईन डे जैसा कोई मुबारकबाद दे रहे हैं.

इस पन्द्रह अगस्त के कारण पटना में लोगों की एक आदत एक परंपरा जैसी बन गयी है जाने कब से(वर्षों से.....मुझे क्या, मेरी माँ को भी याद नहीं). आज के दिन जिलेबी खाने की. जो लोग पटना के हैं वो बखूबी जानते होंगे कि ये क्रेज किस कदर पटना के लोगों पे चढ़ा हुआ है. जिलेबी की ऐसी डिमांड हो जाती है कि आपको लाईन में खड़ा होना पड़ता है जिलेबी लेने के लिए. कहीं कहीं तो धक्कम धुक्की भी करनी पड़ती है. लगभग सभी लोग उस दिन जिलेबी लेते हैं. पन्द्रह अगस्त २००८ को मैं पटना में था. सुबह १० बजे के लगभग पहुँच गया दुकान जिलेबी लेने. दुकानदार ने मुझे एक कागज़ का टोकन थमा दिया जिसमे मेरा कस्टमर नंबर(६५) लिखा था ओर बोला भईया १ घंटा बाद आइये तब मिलेगा. आप सोच ही सकते हैं कि किस कदर पटना वालों पे ये जिलेबी का नशा चढ़ जाता है पन्द्रह अगस्त के दिन. यहाँ तक कि पंद्रह अगस्त पर लगभग हर मिठाई दुकान में आपको जलेबी, बुनिया और लड्डू के अलावा शायद ही कोई फ्रेश मिठाई मिले....मिठाई तो क्या, शायद ही दुकान में कोई ऐसा ग्राहक आता हो जो इन तीनो के अलावा और कोई मिठाई खरीदे. ये जिलेबी का नशा पटना के अलावा ओर कोई शहरों में है या नहीं ये नहीं कह सकता. हम दोस्त लोग(हम ही लोग क्या, लगभग हर लोग) तो ये भी बोल देते हैं कभी कभी की हम लोगों के लिए जिलेबी तो एक राष्ट्रीय मिठाई है.

मुझे हमेशा बैंगलोर से एक शिकायत रही है कि इधर मुझे पन्द्रह अगस्त के दिन वैसी चहल पहल, वैसा उत्साह नज़र नहीं आता. पटना में आँख खुलते ही चारों ओर से देशभक्ति गीत कानों में सुनाई देने लगते हैं. सड़कों पे ऐसा लगता है जैसे कोई जश्न हो. आप जिधर भी नज़र उठा कर देख लीजिये, लगेगा कि पूरा शहर एक जश्न में डूबा है. वैसे भी मैंने पटना से बाहर वैसा उत्साह शायद ही किसी और शहर में देखा हो पंद्रह अगस्त या छब्बीस जनवरी के दिन. गरमागरम जिलेबी की खुशबू....बच्चे हाथ में तिरंगा लिए स्कूल जाते दिखते हैं.. बिलकुल एक माहौल सा बना रहता है. और देखिये ये सब बातें अभी लिखते हुए ऐसा लग रहा है कि पन्द्रह अगस्त का ये सारा नजारा मेरी आँखों के सामने चल रहा हो.जैसे.

यादें और न जाने और कितनी सारी हैं आज के दिन के....जो बाद में लिखता भी रहूँगा लेकिन आज के दिन आपको कुछ ऐसे लोगों से मिलाना चाहूँगा जो एक मिसाल कहे जा सकते हैं. मिलिए कुछ गज़ब के प्रतिभाशाली इनोवेटर से. देखिये इनके बेमिसाल इनोवैशन.

- देखिये कैसे पटाखे रिमोट से चलते हैं


  

- रिक्शे में गिअर 




- यूनिक , बिलकुल.,




- कुछ ओर माई टेक्नोलोजी वालों  से इधर मिलिए ,





इन लोगों पे मीडिया क्यों मेहरबान नहीं है, क्यों इनके योग्यता को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है..? सोचिये अगर बिना किसी  सहायता से ये अपनी "माई टेक्नोलोजी" को इनोवेट कर सकते हैं तो अगर इन्हें सही सुविधाएँ दी जाए तो क्या नहीं कर सकते ? करीब ५-६ साल पहले इंडिया टुडे में ऐसे ही कुछ और इनोवेटर के बारे में पढ़ा था लेकिन उनके नाम कहीं खो कर रह गए. 
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२००७ में मैंने एक ब्लॉग बनाया था जिसपर  मैंने कुछ जानकारियां दी थी अपने देश के बारे में. ये जानकारिय मुझे इंडियन गवर्नमेंट के वेबसाइट से मिली थी. बहुत से लोगों को पता होगा, लेकिन शायद कुछ ऐसे भी होंगे जो इन सब जानकारियों से वाकिफ नहीं हुए होंगे..उनके लिए वो सब जानकारियां हिंदी में प्रस्तुत है...
[मेरे कुछ दोस्तों/जूनियर से खास निवेदन है कि इस जानकारी को कृपया पढ़ें  ]


- हमने अपने दस हज़ार साल से भी ज्यादा के इतिहास में कभी किसी देश पे आक्रमण या उनपर कब्ज़ा ज़माने की कोशिश नहीं की .
-जुलाई १९८७ के फोर्ब्स मैग्जीन के अनुसार संस्कृत कंप्यूटर सॉफ्टवेर के लिए सबसे उपयुक्त भाषा है.
-संस्कृत से ही बहुत से यूरोपीयन देशों के भाषाओँ का जन्म हुआ. 
-भारतीय गणितज्ञ बुधायन ने Pi का मूल्‍य ज्ञात किया गया था, इसके साथ उन्होंने Pythagorean theorem भी दुनिया को बताया.उन्‍होंने इसकी खोज छठवीं शताब्‍दी में की, जो यूरोपीय गणितज्ञों से काफी पहले की गई थी.
-दुनिया को गिनती करना हमने सिखाया, आर्यभट ने.
-1896 तक भारत विश्व में हीरों का एक मात्र स्रोत था(Gemological Institute of America द्वारा) 
- सुश्रुत को "फादर ऑफ सर्जरी" के नाम से भी जाना जाता है. आज से २६०० साल पहले उन्होंने ओर उनके साथियों ने मिलके कैटरैक्ट, आर्टफिशल लिम, फ्रैक्चर जैसी सर्जरी पूरी की.
-सतरंज की शुरुआत हमारे देश में ही सबसे पहले हुई.
-विश्व का प्रथम ग्रेनाइट मंदिर तंजौर(तमिलनाडु) में बृहदेश्वर मंदिर है.
-ऐल्जब्रा, त्रिकोणमिति , कैल्क्लस  भी विश्व को हमने ही सिखलाया.
श्री धराचार्य ने ११ शताब्दी में क्वाड्रैटिक इक्वेश़न दुनिया को बतलाया. 
- ग्रीक और रोमनों द्वारा उपयोग की गई सबसे बड़ी संख्‍या 106 थी जबकि हिन्‍दुओं ने 10*53 जितने बड़े अंकों का उपयोग किया(10**53 = 10 to the power of 53).
- दुनिया का पहला विश्वविद्यालय तक्षशिला में स्थापित किया गया था, 700BCE में. कुल 10,500 से अधिक छात्रों ने दुनिया भर के 60 से अधिक विषयों का अध्ययन किया. नालंदा विश्वविद्यालय चौथी शताब्दी में बनाया गया शिक्षा के क्षेत्र में प्राचीन भारत की महानतम उपलब्धियों में से एक था.
-आयुर्वेद मनुष्य के लिए सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्धति है.
-सांप सीढ़ी का खेल 13 वीं शताब्दी में कवि और संत ज्ञानदेव द्वारा लाया गया था.इसे मोक्षपट भी कहा जाता था उस वक्त. इस खेल में सीढियां वरदानों का प्रतिक थीं जबकि सांप अवगुणों को दर्शाते थे.समय दर समय इस खेल में बहुत बदलाव हुए पर असली अर्थ वही रहा - अच्छे कर्म से स्वर्ग का रास्ता मिलेगा ओर बुरे कर्मों से पुनर्जन्म में फंसियेगा.
-मार्शल आर्ट्स पहले भारत में शुरू हुआ, और बाद में बौद्ध धर्म प्रचारकों द्वारा पूरे एशिया/विश्व में फैला.
- दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक इमारत एक मंदिर अंगकोरवाट,कंबोडिया में है जिसे 11 वीं शताब्दी के अंत में बनाया गया था.
-भास्‍कराचार्य ने पांचवीं शताब्दी में ही सबसे पहले पृथ्‍वी द्वारा सूर्य के चारों ओर चक्‍कर लगाने में लगने वाले सही समय की गणना की थी। उनकी गणना के अनुसार सूर्य की परिक्रमा में पृथ्‍वी को 365.258756484 दिन का समय लगता है.

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चलते चलते एक नज़र तिरंगे का अब तक के सफर को...कितने बदलाव हुए तिरंगे में...



   - आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें !!


COMMENTS

BLOGGER: 25
  1. हार्दिक शुभकामनाएं

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  2. तुम्हे भी शुभकामनायें दोस्त..

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  3. shubhkamnayein aapko bhi bandhu

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  4. १५ अगस्त पर जलेबी...आइडिया बुरा नहीं है ..
    बहुत अच्छी पोस्ट है
    आजादी का दिन मुबारक हहो.

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  5. स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं .
    अपनी पोस्ट के प्रति मेरे भावों का समन्वय
    कल (16/8/2010) के चर्चा मंच पर देखियेगा
    और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.blogspot.com

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  6. माई टेक्नालॉजी वाले विडियो देख कर आनन्द आ गया.


    स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आप एवं आपके परिवार का हार्दिक अभिनन्दन एवं शुभकामनाएँ.

    सादर

    समीर लाल

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  7. विडियो देख कर तो मजा आ गया.लाजवाब !!
    ओर आज़ादी की तुम्हे भी बहुत शुभकामनायें !!

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  8. aapne puraani yaadein tazaa kar di..........
    swatantrata divas ki shubhkamnayein.........

    aapka swagat hai mere blog par bhi.......

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  9. पता नहीं हमने अपने आपको हल्के में लेना क्यों प्रारम्भ कर दिया।

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  10. बहुत बढ़िया post भैया .... !!!
    बहुत जानकारी दी .... और कुछ पुरानी बातें भी याद दिलाई .... !!!

    शुक्रिया ..!!! :)

    Varun

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  11. बहुत बहुत शुभकामनाएं मित्र..

    आज पापा बता रहे थे कि कैसे बुनिया, जलेबी और सेव दही में मिला कर खाए.. :)

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  12. बहुत ही सारगर्भित पोस्ट ...बचपन की कितनी यादें ताजा कर गयी तुम्हारी सरल सी भाषा !! ऐसे ही लिखते रहो दोस्त ....

    १५ अगस्त का ये दिन तुम्हारे अंदर इस उर्जा और सबब को अनवरत रखे यही कामना है !!

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  13. एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए आपको बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं !
    स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!

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  14. बहुत बढ़िया,
    शुभकामनाएं.

    ReplyDelete
  15. बहुत अच्छी प्रस्तुति

    ReplyDelete
  16. Get your book published.. become an author..let the world know of your creativity. You can also get published your own blog book!

    www.hummingwords.in

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  17. awesome infos.
    n videos are superb.

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  18. आज़ादी सोने की चिड़िया स्वर्ण सरोवर में पलती है//
    मुबारका हालाँकि देर से कोम्म्नेट्स कर रहा हूँ क्यों...की बीच में बहुत busy रहा सो...इन पोस्टों को अभी पढ़ रहा हूँ.........

    ReplyDelete
  19. बहुत प्यारी और सटीक पोस्ट भाई...! सच में..! जैसा उत्साह तुमने पटना में बताया है, आम जन के बीच वैसा उत्साह के बारे में हमने भी नहीं देखा या सुना...! और हाँ, जलेबी खाने के बारे में पहले बताना था न....हम भी कल खा लेते...पर चलो, कोई नहीं....पन्द्रह अगस्त तो आएगा न...तब हो जायेगी जलेबी खिलाई....! :)
    पोस्ट तो खूबसूरत है ही...देश की उपलब्धियों की जानकारी भी बिलकुल सटीक है...!
    उंगली का दर्द...लिखने के लिए, युहीं बना रहे.... :) लव यु भाई.... <3

    ReplyDelete
  20. बहुत प्यारी और सटीक पोस्ट भाई...! सच में..! जैसा उत्साह तुमने पटना में बताया है, आम जन के बीच वैसा उत्साह के बारे में हमने भी नहीं देखा या सुना...! और हाँ, जलेबी खाने के बारे में पहले बताना था न....हम भी कल खा लेते...पर चलो, कोई नहीं....पन्द्रह अगस्त तो आएगा न...तब हो जायेगी जलेबी खिलाई....! :)
    पोस्ट तो खूबसूरत है ही...देश की उपलब्धियों की जानकारी भी बिलकुल सटीक है...!
    उंगली का दर्द...लिखने के लिए, युहीं बना रहे.... :) लव यु भाई.... <3

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  21. बहुत प्यारी और सटीक पोस्ट भाई...! सच में..! जैसा उत्साह तुमने पटना में बताया है, आम जन के बीच वैसा उत्साह के बारे में हमने भी नहीं देखा या सुना...! और हाँ, जलेबी खाने के बारे में पहले बताना था न....हम भी कल खा लेते...पर चलो, कोई नहीं....पन्द्रह अगस्त तो आएगा न...तब हो जायेगी जलेबी खिलाई....! :)
    पोस्ट तो खूबसूरत है ही...देश की उपलब्धियों की जानकारी भी बिलकुल सटीक है...!
    उंगली का दर्द...लिखने के लिए, युहीं बना रहे.... :) लव यु भाई.... <3

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आप सब का तहे दिल से शुक्रिया मेरे ब्लॉग पे आने के लिए और टिप्पणियां देने के लिए..कृपया जो कमी है मेरे इस ब्लॉग में मुझे बताएं..आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा...टिप्पणी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..शुक्रिया

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मेरी बातें : पन्द्रह अगस्त - कुछ यादें मेरी..कुछ नयी बातें, कुछ पुरानी बातें
पन्द्रह अगस्त - कुछ यादें मेरी..कुछ नयी बातें, कुछ पुरानी बातें
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