--> बैंगलोर, दिल्ली , पटना...राखी

बैंगलोर, दिल्ली , पटना...राखी

वैसे तो राखी हर भाई के लिए बड़ा ही महत्वपूर्ण त्यौहार होता है..जो भाई घर से दूर दूसरे शहरों में रह रहे हैं, वो हर मुमकिन कोशिश करते हैं की राखी का त्यौहार बहनों के साथ मनाया जाए.पिछले कुछ हफ़्तों से मैं भी इसी कोशिश में लगा हुआ था की कैसे रक्षाबंधन के मौके पे घर जा सकूँ. कुछ मित्र भी राखी के मौके पे पटना आने वाले थे, तो सोचा चलो राखी बंधवाने के साथ साथ दोस्तों से भी मुलाकात हो जायेगी. प्लानिंग तो कर ली थी हमने की राखी पे घर जायेंगे, ऐसे में सबसे बड़ा काम जो बाकी था वो था ऑफिस से छुट्टी लेना. संयोग्वास मुझे खबर लग गयी थी, की दिल्ली और पटना में कुछ ऑफिस का काम पेंडिंग पड़ा है.. तो एक जिम्मेदार कर्मचारी(:P) होने के नाते मैंने अपने मैनेजर से कहा की सर आप फ़िक्र मत करें, मैं ये सब काम कर दूँगा...बस., फिर क्या था खुशी खुशी हमारे मैनेजर साहब जी ने दस दिनों की ओफिसिअल  टुर की इजाजत दे दी..मैनेजर साहब तो खुश थे की उनका काम हो रहा है और मैं खुश था की चलो आखिरकार बिना किसी झमेले में फंसे छुट्टी मिल गयी :)

तय तो शुरू में ये हुआ था की हमें दिल्ली १८ अगस्त को पहुंचना है, लेकिन अंतिम समय पे कुछ काम आ जाने के वजह से हमारा प्रोग्राम २ दिनों के लिए टल गया..अब हमारे मैनेजर साहब इतने भी दरियादिल नहीं हैं की हमें फ्लाईट की टिकेट दें...तो ट्रेन से ही आना था हमें..ट्रेन टिकेट मिलने में भी बड़ी मुश्किल हो रही थी..जैसे तैसे १८ अगस्त की टिकेट कन्फर्म हुई.सोचा तो ये था की २० अगस्त को दिल्ली पहुँच के अजय भईया और चचा जी से मुलाकात करूँगा, लेकिन उस दिन काम में ऐसा फंसा रहा की दोनों से मुलाकात नहीं हो पायी.फोन करने को दिल किया, लेकिन ये सोच के की क्या कहूँगा फोन पे, मिलने का वादा तो पहले ही कर दिया था,अब क्या कहूँगा....यही सब बातें सोच के फोन नहीं किया और सोचा की पटना पहुँचने के बाद आराम से बात कर के उनसे माफ़ी मांग लूँगा..:) अगले दिन भी कुछ काम पेंडिंग था, कुछ दोस्तों से मिलना भी था, लेकिन ऐसा कुछ दुर्भाग्य रहा मेरा की उन दोस्तों से भी मुलाकात नहीं हो पायी.कुछ तो अपने कामों में अचानक से बीजी हो गए और थोड़ा मेरा प्लान कुछ चेंज सा हो गया था..दिल तो किया की कह दूँ उनसे, छोर के सारे काम मिलने आ जाओ, लेकिन पता नहीं क्यों नहीं कह पाया..शाम तक मन थोड़ा बोझिल सा हो गया था और दुखी भी..

दुखी मन से रेलवे स्टेसन के तरफ बढ़ा..ये जान रहा था की टिकेट रेजर्वेसन मगध एक्सप्रेस से है, जो की पटना जाने वाली खराब ट्रेनों की श्रेणी में आती है, फिर भी सोचा की मूड तो वैसे ही खराब है, और इससे खराब क्या होगा...जैसे ही रेलवे स्टेशन पहुंचा तो कानों में अनाउन्स्मन्ट की आवाजें आ रही थी "मगध एक्सप्रेस इज लेट बाई ऐट आउर्ज़"   अब तो मैं दुखी के साथ साथ हद दर्जे का फ्रस्टेटे हो गया था.आठ बजे वाली ट्रेन अब सुबह चार बजे खुलेगी..टाईमिंग भी तो ऐसी की कहीं जा नहीं सकते, वहीँ स्टेशन पे ही बैठे बोरे होते रहना परेगा..एक पल सोचा की किसी दोस्त के घर चला जाऊं, लेकिन फिर इस सोच से की सुबह चार बजे ट्रेन है और नज़दीक में किसी भी दोस्त का घर नहीं..तो प्लान कैंसल कर दिया..त्यौहार के समय तो सब लोगों को घर जाना होता ही है, और ऐसे में रेलवे प्लेटफोर्म पे जबरदस्त भीड़ रहती है..फ्रस्टेट तो मैं था ही, और बैठने की जगह नहीं मिल पाने की वजह से मूड और चिडचिडा हो गया था..खैर, बड़ी मुश्किल से वेटिंग रूम में एक सीट मिली बैठने के लिए..सोचा की चलो सुबह चार बजे तक लैपटॉप पे एक दो मूवी ही देख लूँगा बैठे बैठे..की अचानक साढ़े इग्यारह बजे एक और अनाउन्स्मन्ट की आवाज़ कानों में आई, "मगध एक्सप्रेस कल सुबह आठ बजकर तीस मिनट पे रवाना होगी." ..पता नहीं ये  अनाउन्स्मन्ट सुनने के बाद मैंने कितनी गालियाँ दी होंगी रेलवे को ;). जी तो कर रहा था की एक रोड लेकर पूरा स्टेशन तबाह बर्बाद कर दूँ :P खैर, अपने आप को सँभालते हुए मैंने सोचा की चलो फ़िलहाल एक कोई होटल ले लूँ आस पास में ही, ताकि रात थोड़े आराम से कटे..


त्यौहार का मौसम है, तो और किसी ट्रेन से टिकेट मिल पाना भी संभव नहीं था.एक मात्र मगध एक्सप्रेस ही पटना तक जाने का सहारा था..सुबह बिलकुल ठीक टाइम पे ,साढ़े आठ बजे ट्रेन आकार प्लेटफोर्म पे लग गयी और सही टाइम पे खुल भी गयी. ट्रेन की जो स्पीड शुरू के ३-४ घंटे रही, उसे देख तो दिल खुश हो गया, सोचा चलो अब रात के इग्यारह बजे तक तो पहुँच ही जायेंगे पटना..लेकिन खराब ट्रेन का टैग जो मगध एक्सप्रेस के साथ जुड़ा हुआ है, कैसे समय पे पहुँचती...शाम चार बजे ही अपने असली औकात पे आ गयी ये ट्रेन...सुबह के चार बजे पटना स्टेशन पहुंचाई है हमें..एक तो दिल्ली से ट्रेन बारह घंटे लेट खुली और जर्नी के अठारह घंटे..कुलमिलाकर तीस घंटे का सफर दिल्ली से पटना तक का.

थक तो बहुत ज्यादा गया था पुरे सफर के दौरान, पहले बैंगलोर से दिल्ली आना और फिर दिल्ली में काम काज में व्यस्त रहना और ये सफर..जब घर पहुंचा तो कुछ शांति -सुकून नसीब हुआ.. :) 


कल रक्षाबंधन है और आज सुबह सबसे पहले मैंने रश्मि दी का ये पोस्ट पढ़ा ..बड़ा अच्छा अच्छा सा महसूस हो रहा है ये पोस्ट पढकर...तो सोचा की मैं भी रश्मि दी को मुबारकबाद दे दूँ, अब उनके जैसी अच्छी और खूबसूरत कविता तो नहीं लिख सकता....:) रश्मि दी के साथ शिखा दी को भी मुबारकबाद देता हूँ राखी की :) आप दोनों के लिए ये मिठाई....अब खा लेना और कुछ शिकायत मत करना ;) :P


फ़िलहाल  थका हुआ सा हूँ, बस सोचा की ये पोस्ट लिख दूँ, चलते चलते...


सभी  ब्लोग्गर मित्रों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं...

COMMENTS

BLOGGER: 13
  1. Hmmm jaise i'hv told u earlier, hamesha yaad rahega apko ye trip ! :P n yupp station tod dena tha....no doubtss ! :D :P
    well i tried alott .. ki ap zada bore mat ho....but still can understand wat u feel in absence of ol frnzzz !

    nywyss thnx bro 4 cuming ! :) itzz really gr8 to c after suchaa long tym ! :)
    hope u come agn n agn ! :D :D

    luvv yaaa.....n happy rakhi ! :)

    Say rakhi to ol sis frm my side ! :) :) :)

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  2. रक्षा बंधन पर समय से घर पहुचने की बहुत सारी बधाइयाँ...................

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  3. ओहो 'अभी'....इरादा क्या है??....अभी अभी ओणम का भोज (ओणासद्य ) खाकर आ रही हूँ...और इतनी सारी मिठाइयाँ??.....पूरे एक साल की वाक कुर्बान हो जायेगी...jst joking....:)..पोस्ट का आखिरी पैराग्राफ बहुत ही प्यारा है...
    बाकी पोस्ट से तो पता चल रहा है...कितना झेला होगा तुमने....ये भारतीय रेलवे कभी नहीं सुधरेगी...पर चलो अब मूड ठीक कर लो...घर आ गए हो....अपनी मनपसंद चीज़ें बनवा कर खाओ और बहनों से गप्पे मारो....शुभकामनाएं

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  4. Raksha Bandhan ki dher saari Shubh Kamnaaye aapko aur aapki behnoko :)

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  5. Raksha bandhan kee anek shubh kamnayen!
    Bhai 10 mint ke fasale pe hai..dil karta hai,usse kahun,raksha ki ummeed nahee,pyarka bandhan to nibha le!Bandhan na sahi,pyarse gale to laga le!
    Khush qismat hain aapki bahane!

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  6. हम त सोच लिए थे कि तुमरा ई पोस्ट पर कोनो जवाब नहीं देंगे...लेकिन मन नहीं मानता है, तुमरे जईसा नहीं हैं न... तुम त हमको बतएबो नहीं किए थे कि तुमको दिल्ली आना है..हम त बाई चांस फेसबुक पर दएख लिए अऊर तुमको फोन करके पूछे कि कब आ रहे हो अऊर कहाँ आना है.. मगर तुमको त हमरा चचा वाला बात मजाक लगता होगा कि हम ऐसहीं बचवा बोल दिए थे तुमको, अऊर ऐसही चचा सुनकर खुस हो गए, है ना!!
    तुमको पता है 18 तारीख से तुमरा फोन के इंतजार में थे.. फिर देखे कि तुम किसी को बोले कि 22 को आना है..आज फोन किए.. मगर कोनो रेस्पोंस नहीं..तब छोड़ दिए... बताओ इस्टेसन से हमको फोन कर सकते थे, हमरे घरे आ सकते थे… मेट्रो से सीधा, नहीं त हम आ जाते.
    लेकिन बात त सही है, ई आभासी दुनिया में हमरे जईसा कुछ इमोसनल फूल है, जो किसी के नहीं आने से परेसान हो जाता है, अऊर कोई गायब रहे त दुनिया भर में पूछता फिरता है कि कहीं देखे हो उसको.
    खैर, जहाँ रहो खुस रहो!!

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  7. बेहतरीन पोस्ट,घर पहुंचना भी जरुरी होता है।
    श्रावणी पर्व की शुभकामनाएं

    लांस नायक वेदराम!---(कहानी)

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  8. ये सही है भतीजे..घर पहुँच गये.

    रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  9. भाई-बहिन के पावन पर्व रक्षा बन्धन की हार्दिक शुभकामनाएँ!
    --
    आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है!
    http://charchamanch.blogspot.com/2010/08/255.html

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  10. आपका धेर्य था जो बैठे रहे.. स्टेशन बर्बाद कर देते तो मजा आता.. मुझे पढ़ कर ही गुस्सा आ रहा है.. लेट होने की भी कोई सीमा होनी चाहिए न...

    खैर अब एन्जॉय कीजिये... वापस भी तो जाना है न?

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  11. रक्षाबंधन पर्व की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

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  12. अरे ऐसा ही कुछ हमारे साथ भी हुआ है :) कभी कभी होता है ..
    पर इतनी मिठाइयां खिलाने का बहुत शुक्रिया ..पूरी प्लेट मेरी हो गई :) क्योंकि रश्मि ने तो बहुत खा लिया ओणम में :)

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  13. अरे ट्रेन का इतना इंतजार ... बहुत नाईंसाफ़ी है... और जब मिलना हो और अपने पास समय न हो तो बिल्कुल बेसरम बनकर बुला लेना चाहिये, कम से कम मिलना तो हो ही जाता है।

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आप सब का तहे दिल से शुक्रिया मेरे ब्लॉग पे आने के लिए और टिप्पणियां देने के लिए..कृपया जो कमी है मेरे इस ब्लॉग में मुझे बताएं..आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा...टिप्पणी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..शुक्रिया

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