--> ऋचा वेड्स अंशुमान : (२)

ऋचा वेड्स अंशुमान : (२)


अगले दिन शादी थी..लेकिन हमारी चिंता का विषय शादी की तैयारी नहीं कुछ और था..कुछ अनचाहे कारणों के वजह से लड़के वालों को सारे रस्म एक दिन निभाने पड़े..सारे विध एक दिन करने पड़े थे.वैसे तो हम लोगों में लड़की पक्ष वाले शादी के दो दिन पहले तिलक ले के लड़के पक्ष वालों के यहाँ पहुँचते हैं.लेकिन कुछ परिस्थितियों के वजह से हमें तिलक ले के लड़के वालों के घर शादी के दिन ही पहुंचना था.वैसे तो इस बात के लिए हम पहले से तैयार थे, और सब प्लानिंग इन परिस्थितियों को देख के ही की जा रही थी.चूंकि शादी हम होटल से कर रहे थे, तो बहुत सी चिंता और परेशानी कम हो गयीं थी.कैटरिंग,पंडाल और साज-सजावट सम्बंधित सभी सर दर्द होटल वालों के थे..लेकिन फिर भी शादी के ही दिन तिलक ले के जाना, थोड़ा ज्यादा व्यस्त कर गया.खास कर के मुझे.



थोड़ी टेंसन तो थी ही, वो इस सम्बन्ध में की तिलक चढ़ाना मुझे था और मुझे इस बात की जानकारी बहुत कम थी, की वहां करना क्या होता है.वैसे तो पहले भी बहुत से शादियों में तिलक के रस्म में शामिल हुआ हूँ, लेकिन फिर भी  थोड़ी बहुत चिंता थी.लड़के वालों के घर तिलक लेके लड़की के भाई को जाना होता है..मेरे एक बड़े भाई, मुनचुन भैया मेरे साथ चल रहे थे,और इस बात से बहुत ज्यादा राहत थी मुझे..शादी के लिए पंडित जी को हमने खास अपने गाँव से बुलवाया था.तिलक में शायद उनके रहने के कारण मुझे रस्मों को समझने और करने में बहुत आसानी हुई..कौन से विध और रस्म कैसे करने होते हैं, सब उन्होंने पहले से ही समझा रखा था.

तिलक की अंगूठी पहनते हुए.

तयानुसार हमें सुबह आठ बजे तिलक लेके जाना था..लेकिन जैसा की मैंने पहले बताया, कुछ अनचाहे परिस्थितियों के वजह से लड़के वालों को सारे विध निभाने में थोड़ी देर हो गयी, और हमें सुबह के बजाये दिन के दो बजे तिलक लेके जाना पड़ा.तिलक से वापस आते आते हम लोगों को शाम हो गयी, चार पांच बज गए थे.होटल भी शादी के लिए शाम पांच बजे से ही बुक था..लड़के वालों के यहाँ से वापस आने में मुझे इतनी देर हो गयी थी, की सही से तैयार होने का भी वक्त नहीं मिला.उस समय लग रहा था की शादी की व्यस्तता किसे कहते हैं :).



प्रशांत,मैं,विशाल,अकरम.

मेरे बड़े भाई बबलू भैया और मेरी जिम्मेदारी थी जनवासा पे रहने की.लड़के वालों का स्वागत करने की.मेरे कुछ दोस्त जो शादी में आये थे, उन्हें भी मैंने वहीँ बुला लिया.लड़के वालों को आने में देरी थी, तो वहीँ जनवासे पे  हम दोस्तों की राउंड टेबल कान्फेरन्स चलने लगी :).मजाक, कॉलेज के किस्से,एक दूसरे की खिंचाई और भी बहुत सारे बकवास :) ..बारात आने में करीब दो घंटे की देरी हुई और इन दो घंटों में मेरे किसी भी दोस्त का मुहं बंद नहीं हुआ...चाहे वो बकवास करने में हो, कोफ़ी पीने में या नाश्ता करने में :P.चार दोस्त आये थे मेरे..हमारे डॉक्टर मित्र राहुल,अकरम,विशाल कश्यप और प्रशांत प्रियदर्शी.प्रशांत के साथ प्रशांत के एक भाई भी आये थे.चारों दोस्त एक से बढ़कर एक नालायक..लेकिन फिर भी इन नालायकों के बीच ही सही, समय बहुत अच्छा गुजर..इसी बीच दो दोस्त, दोनों अमरीका वाले दोस्त का फोन भी आया.एक थी स्तुति, और दूसरा था सुदीप.

यहीं जनवासे पे एक ऐसी बात हुई, जो मेरे दिल को छु गयी.बहन की शादी का इन्विटेसन मैंने कई लोगों को ई-मेल किया था..उनमे से कुछ ने ये कहा था की अगर वो ना आ पाए तो कोई न कोई उनके तरफ से आ जरुर जाएगा शादी में शामिल होने को.अमृता तन्मय जी, जो एक लेखिका हैं, और जिनसे मेरी जान पहचान ब्लॉग के जरिये करीब तीन महीने पहले हुई थी.जब इन्हें मैंने इन्विटेशन दिया, तो इनका जवाब आया की वो थोड़ी अस्वस्थ हैं, लेकिन उनके बदले कोई न कोई जरूर आएगा. शादी वाले दिन अमृता जी ने अपने भाई के हाथों एक खूबसूरत तोहफा भेजवाया.मुझे उस समय बेहद खुशी हुई थी, की ब्लॉग के जरिये अमृता जी से जो रिश्ता बना था, उसे उन्होंने और पुख्ता कर दिया. प्रशांत ने भी थोड़ा फोर्मलिटी निभाते अपने और स्तुति के तरफ से जब तोहफा दिया, तो उस समय मुझे लगा स्तुति भी किसी न किसी तरह से इस शादी में शामिल है :).काफी अच्छा लगा मुझे और मुझसे ज्यादा मेरी बहन को, स्तुति का नाम देख के. :)

बेचारे परेसान हैं, सब बैंड बाजे वाले उन्हें घेरे हुए है.. ;)

जो दुल्हे साहब थे,वो बेहद ही सीधे सादे से. उन्हें शादियों के बारे में बहुत कम जानकारी थी, विध रस्मे, बहुत कम पता था उन्हें.जब जनवासे से बारात के चलने का वक्त आया तो, बैंड बाजे वालों ने उन्हें घेर लिया.पहले तो वो समझ नहीं पा रहे थे की हो क्या रहा है, फिर मैंने कान में चुपके से बताया, की बैंड बाजे वाले कुछ माल-पानी का मांग कर रहे हैं, बेचारे ने मुझसे प्रश्न किया, यहाँ देना भी पड़ेगा क्या?..मैंने कहा की आपकी मर्जी, नहीं दीजियेगा तो बारात बिना बैंड बाजे वाले के ही ले जाना होगा ;). तब जाकर दुल्हे महराज के वालेट का कुछ भार कम हुआ :).

दुल्हे साहब के छोटे भाई, अनुपम शादी के रात एकदम जोश में थे...भई आखिर उनके बड़े भाई की शादी थी..अनुपम और उनके मित्रों ने खूब डांस किया, एकदम बाराती वाला नाच टाइप.दुल्हे बाबु भी कहाँ पीछे रहने वाले थे..अपने शादी में डांस का मौका वो कहाँ छोड़ने वाले थे, वो भी रंग में संग हो लिए :).

पॉकेट ढीली करनी ही पड़ी उन्हें :)
अपने भाई अनुपम के साथ नाचते हुए अंशुमन जी(दुल्हे मियां)


जाड़े की रात होने के कारण और बारात के आने में थोड़ी देरी होने के वजह से कुछ लोकल गेस्ट वापस जा चुके थे.और जो बचे रह गए थे उनमे से अधिकतर हमारे परिवार के लोग थे.दुल्हे महराज हमारे परिवार की लम्बाई-चौड़ाई देख थोड़े चकित से थे :), नाते-रिश्तेदारों को इतने ज्यादा संख्या में देख थोड़े तो चकित हुए थे ही वो, मुझसे उन्होंने कहा भी था बाद में, की आपका परिवार बहुत लंबा है.दुल्हे महराज को काफी असहजता हो रही थी स्टेज पे जाने में.मुझसे कह रहे थे, की सब लोगों की नज़रें मेरे ऊपर ही टिकी हैं, अजीब सा लग रहा है यहाँ बैठना.बेचारे जयमाल तक थोड़े असहज दिखे स्टेज पे..आख़िरकार जब वो स्टेज से उतरे तब जाकर कहीं चैन की सांस ली होगी उन्होंने :).


जयमाल 
जयमाल के बाद 
मेरे पापा, मैं,माँ,बहन,अंशुमान जी,उनके माँ,पापा,और भाई 
अंशु, मेरी बहन दीप्ती,मैं,निमिषा, और दूल्हा-दुल्हन 
दो बहनें, दीप्ति और निमिषा के साथ 

बहुत लोगों से सुन चूका था, देख चूका था की शादी में बाराती वाले तमाशे करते हैं, थोड़े नखरे भी दिखाते हैं..मित्र प्रभात ने भी इस समबन्ध में थोड़ा पहले से ही सावधान कर दिया था मुझे.लेकिन शादी के दौरान कभी भी हमें उस तरह के कुछ तमाशे या नखरे लड़के वालों के तरफ से झेलने को नहीं मिले..किसी भी किस्म का वाद विवाद नहीं हुआ..घर की शादी हो और घर की लड़की की शादी हो तो उसमे घर वाले कहाँ एन्जॉय कर पाते हैं, लगभग ऐसी ही हालत मेरी थी, पुरे शादी में काम की वजह से सही ठंग से ना साज सजावट को देख पाया और ना ये की खाने में कौन कौन से डिशेज थे.

जनवासे पे जब तक बारात नहीं आई थी, तब तक ज्यादा व्यस्तता थी नहीं, लेकिन बारात आने के बाद से एकाएक ज्यादा काम निकल आया..ऐसा लगा मुझे.जब बड़े मामा ने मुझसे कहा की खाना अच्छा बनाया है, तब मुझे याद आया की मैंने खाना नहीं खाया..जल्दी जल्दी प्लेट में खाना लेकर खाने बैठा.जल्दबाजी इस कारण भी थी, की तुरत विध शुरू होने थे.अब लगता है, की कम से कम मैंने खाना तो खाया, वरना लोग तो बहन की शादी में खाना ही भूल जाते हैं :P..जैसे प्रभात..दो महीने पहले अपनी दीदी की शादी में, प्रभात बेचारा बाराती के स्वागत-सत्कार में खाना तक नहीं खा पाया था.


शादी में जो भी विध होते थे, वो लगभग सभी पहले से जानता था मैं,बस अंतर इस बार ये था की कुछ विध उसमे से मुझे करने थे.सबसे पहला विध जो मुझे करना था, वो था की दुल्हे के गले में धोती डाल के उन्हें मंडप के चारों तरफ दौड़ाना.दुल्हे साहब तो ये सब विध से अनजान, मुझसे कहने लगे की 'थोड़ा स्लो स्लो चलियेगा अभिषेक जी'..फिर मैंने भी उन्हें तसल्ली दी, 'चलिए आपके लिए थोड़ा डीसेन्सी मेंटेन करते हुए, आपको दौड़ाऊँगा नहीं, आराम से आपको चक्कर लगवाते हैं :)'.दूसरी बार जिस विध में मेरी जरुरत पड़ी वो थी फेरे लेने वक्त, सूप में लावा देने के लिए.विध तो और भी हुए, लेकिन विधों के नाम जानने के बावजूद मैं सही सही नहीं कह पाऊंगा की कौन से विद्द किस कारणवश होते हैं.

करीब सुबह चार-पांच बजे के आसपास शादी संपन्न हुई.सब कुछ जब निपट गया था.शादी बहुत ही अच्छे तरीके से और खुशी खुशी संपन्न हुई.ये हम लोगों के लिए बहुत संतुष्ट करने वाली बात थी.शादी में जो सोचा , सब कुछ लगभग उसी तरीके से संपन्न हुआ.मैं एक अरसे के बाद कोई भी शादी देख रहा था,और वो भी अपनी बहन की शादी.तो कभी कभी बहुत ज्यादा नॉस्टैल्जिक भी हो जा रहा था.जो एक चीज़ मैंने थोड़ा मिस किया वो ये था की अपनी बहनों के साथ बैठ के थोड़ा समय बिताने का वक्त नहीं मिल पाया.वैसे इसका कारण भी ये रहा की काम कम तो होते नहीं, अगर मैं काम में व्यस्त रहा तो उन लोगों के पास भी तो कोई कम काम नहीं थे..

लेकिन अंत में खुशी इस बात की रही की शादी सही और अच्छे से संपन्न हुई, सब लोगों ने शादी के व्यवस्थाओं की खूब तारीफ़ की.लड़के वालों ने भी तारीफ़ की.मुझे याद है की जब अंशुमान जी को मैं लेके पंडाल में आ रहा था, तो उन्होंने उसी वक्त पुरे व्यवस्थाओं की बहुत तारीफ़ की.किसी भी शादी में सबसे बड़ी बात येही होती है की सब खुशी खुशी शादी में आये और अच्छी यादें लेकर वापस जाए.मैं समझता हूँ की बहन की शादी में ये दोनों बातें हुई. :)


कुछ तस्वीर रस्मों की 

पूरी शादी में मेरे दो दोस्त रात भर मेरे साथ रहे..अकरम और प्रशांत.और मुझे काफी अच्छा लग रहा था की ये दोनों मेरे साथ हैं.रात भर, विधो के बीच जब भी मुझे समय मिल रहा था, मैं इन्ही दोनों के पास जाकर बैठ जा रहा था.बहुत से पुराने और अच्छे पल हमने याद किये.शादी जब खत्म हो गयी थी तो मैं अपने दोनों दोस्तों को लेकर जनवासे पे निकल गया..बारात वाले आराम करने के लिए वापस वहीँ गए थे.बारात वाले सब तो जाकर आराम से सो गए, सुबह सुबह की चाय पी के प्रशांत भी निकल गया.बच गए थे दो लोग..अकरम और मैं, और मेरे भैया(मुनचुन भैया).भैया भी थोड़ी देर के लिए सो गए.बचे रह गए थे अकरम और मैं.मैंने कभी सोचा नहीं था, की ऐसे ऐसे विषय जिसपे मैं अकरम के साथ कई दिनों से बात करना चाह रहा था, अपनी बहन की शादी में करूँगा.लेकिन उस समय उन विषयों पे बात कर के ऐसा लगा की रात भर की सारी थकान एकदम से गायब हो गयी.शादी संपन्न हो चुकि थी, और अब दिन में कच्ची खा के बिदाई की तैयारी करनी थी, तो सब वापस घर आ गए.
(कच्ची-शादी के दूसरे दिन दोपहर में मछली-चावल बनता है, उसे कच्ची भोज कहते हैं)
मैं और मेरे भैया..(शादी खत्म होने के बाद की तस्वीर..जनवासे के बहार चाय दुकान के पास की तस्वीर 


[पिछले पोस्ट में विवेक भैया ने जानना चाहा था की हमारे तरफ कौन से विध होते हैं, जिससे उन्हें ये पता लगे की क्या क्या समानताएं हैं और क्या क्या असमानताएं हैं उनके इधर होने वाले शादियों में और हमारे इधर..लेकिन उन सब विध,रस्मों का लेखा जोका देना अभी संभव नहीं है..बाद में हो सके, तो कभी कोई पोस्ट लिखूंगा ,क्यूंकि मुझे उसमे अपनी माँ की थोड़ी बहुत मदद लेनी पड़ेगी:).]


..जारी

COMMENTS

BLOGGER: 23
  1. धांसू पोस्ट लगाये हो भाई !
    सब की सब फोटो गजब ... तुम्हारी और अंशुमन जी की टुनिंग बढ़िया हो गई है यह तो फोटो से ही समझ में आ रहा है ... वैसे यह रिश्ता भी बड़ा अजीब होता है साले - बहनोई का ... हम तो दोनों है ... किसी के साले तो किसी के बहनोई ... सो सारे अनुभव होते रहते है !
    अगली पोस्ट पर शायद ही कुछ कह पायूँगा ... पहले ही बताया है विदा के मामले में बहुत बेकार है !

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  2. वाह पूरा ब्यौरा बहुत ही सुन्दर ढंग से दिया है ..लगा हम भी शादी में शामिल हैं ..हाँ ये दुल्हे के गले में पटका डाल कर दौडाने वाली रस्म पहली बार सुनी/देखी:)बढ़िया लिखा है और तस्वीरें भी मस्त हैं.

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  3. bahut sundar post... पूरा विधिविधान ... चाहे शोर्ट में .. लेकिन पोस्ट खूब लंबी और चित्रों सहित बहुत लुभावनी है.... कल आपकी यह पोस्ट चर्चामंच पर होगी ... आपका आभार ... आप चर्चामंच पर आ कर अपने विचार अभिव्यक्त कर हमें अनुग्रहित करियेगा ..
    .http://charchamanch.blogspot.com

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  4. कल यानि शुक्रवार १८ फरवरी को .. चर्चामंच पर

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  5. लगा..जैसे शादी का वीडियो देख लिया....बड़ी बारीकी से सारी चीज़ें लिखी हैं...कई रस्मों का तो अर्थ हमें भी नहीं पता....{कोई एक्सप्लेन भी नहीं करता :( }..पर मजा बहुत आता है शादी में...

    तस्वीरें तो बहुत ही सुन्दर हैं...वर-वधु बड़े सुन्दर लग रहे हैं....आँखें जुड़ा गयीं...ऐसा ही कहते हैं ना :)...मैं भी इस पोस्ट के माध्यम से उसी माहौल में पहुँच गयी.

    और लड़की के भाई तुम इतना सूटेड-बूटेड घूम रहे हो... खाना भी खाने का वक्त मिल गया...वाह...और इतने बिजी भी थे...(relax...just joking....पता है....तुमने सच में कितना काम किया है)

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  6. a lengthy but beautiful post!!
    picz are amazingly beautiful :-)
    richa and anshuman looking so so made for each other type couple :)
    beautiful moments!!
    touchwood! :-)

    supelike this post..

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  7. सच्चो लग रहा है कि हम लोग सब बिध होते हुए देख रहे हैं!!

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  8. बहुत सुंदर ...... शादी के कई रिवाज सभी जगहों एक जैसे हैं ....... फोटो बहुत ही सुन्दर हैं ....अच्छा लगा देखकर

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  9. अच्छा लगा सब तस्वीरें और विवरण देखकर.

    ऋचा एवं अंशुमान को बहुत आशीर्वाद एवं मंगलकामनाएँ.

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  10. चित्र और विस्तार के साथ वर्णन , अब केवल स्मृति का न होकर, हमेशा के लिए इन्टरनेट रिकार्ड का एक हिस्सा बन गए हैं ! बधाई एवं शुभकामनाये !

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  11. arrre waah! bahut he acchi tasveeriein hai! har chezz ki aapne ache se explanation hi di hai! aisa lag rha tha ki main hi shaadi main present thi!!

    ladke walo ke saach main bahut nakhre rehte hai! accha hua aapko iss ka samna nhi karna pdha!

    lot of blessings to the couple :-)

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  12. मेला मेला...
    हमारे यहं शादी किसी मेले कम बढ़ा फेस्टिवल थोड़े होता है.... ख़ैर दूसरी पोस्ट के लिए बधाई.. शादी में हुई थकावट की परत पोस्ट से भी पुती नज़र आती है..अरे अभिषेक भैया तनी खुश होइए बहन को तो जाना ही है एक रोज घर से...जरा खुश हो के लिखये plz .....

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  13. ऐसा लगा, शादी की फिल्म चल रही है, बहुत ही सुन्दर चित्र।

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  14. दुल्‍हे दुलहनि‍या के लि‍ये हमारी भेंट
    http://rajey.blogspot.com/ पर

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  15. bahut sundar likha...laga jaise shadi ka video dekh rhi hun...sabhi photos bahut achchi hai...

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  16. अभि , शादी का लाइव टेलीकास्ट इतना लाइव है कि पलक झपकाना भी भूल गए ..बस शादी में शामिल हो लिए ..वर-वधु को आशीर्वाद ...तुमने पोस्ट के माध्यम से उन्हें जो तोहफा दिया है ..हम सबों को भा रहा है . रही बात मेरी तो मैं तुमसे निपट लुंगी ...अपनी खैर मनाओ ....

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  17. ऋचा एवं अंशुमान को मंगलकामनाएँ....

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  18. बहुत ही उम्दा रचना , बधाई स्वीकार करें .
    आइये हमारे साथ उत्तरप्रदेश ब्लॉगर्स असोसिएसन पर और अपनी आवाज़ को बुलंद करें .कृपया फालोवर बनकर उत्साह वर्धन कीजिये

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  19. बहुत सुंदर ...... शादी के कई रिवाज सभी जगहों एक जैसे हैं ....... फोटो बहुत ही सुन्दर हैं ....अच्छा लगा देखकर

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  20. बाबू साहेब!! फोटोग्राफर का नाम देना भूल गए हो.. इस पोस्ट के अधिकाँश फोटो मैंने लिया है.. :P

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  21. बेटा, कब तक मोना की शादी, मोना की शादी राटोगे? अपना नंबर कब लाओगे?

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  22. अच्छी-प्यारी सी पोस्ट लिखने के लिए तुमको शाबाशी और लगे हाथ प्रशांत को भी अच्छी photos के लिए गुड जॉब!!! बोल ही देते हैं...:)
    कुछ रस्म नई सी लगी, कभी फुर्सत में पूछा जाएगा उनके बारे में...:)

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आप सब का तहे दिल से शुक्रिया मेरे ब्लॉग पे आने के लिए और टिप्पणियां देने के लिए..कृपया जो कमी है मेरे इस ब्लॉग में मुझे बताएं..आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा...टिप्पणी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..शुक्रिया

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मेरी बातें : ऋचा वेड्स अंशुमान : (२)
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