--> एक साइकिल का दिख जाना और जाने क्या क्या फ़साना माज़ी का याद आना - 2

एक साइकिल का दिख जाना और जाने क्या क्या फ़साना माज़ी का याद आना - 2

Image: Team BHP

पिछली पोस्ट में
आपने पढ़ा कि कैसे मुझे ज़माने बाद साइकिल चलाने को मिली. जिनके वजह से साइकिल चलाने को मिली, उनके साथ बड़े देर तक साइकिल पर चर्चा होती रही. कुछ पुरानी बातें याद आयीं, तो सोचा क्यों न उन बातों को यहाँ सहेज लिया जाए..

मेरे ख्याल से मेरे साथ उम्र वाले अधिकतर लोग साइकिल से एक कनेक्शन महसूस करेंगे. हम जब स्कूल में थे तो हमें महँगी बाइक नहीं मिलती थी चलाने के लिए. बहुत जिद करने पर हमें साइकिल खरीद दी जाती थी. और हम साइकिल ही ऐसे चलाते थे, उतने ही ठाठ और गर्व से जैसे आज के बच्चे महँगी बाइक और कार सड़क पर दौड़ाते हैं. 

साइकिल वैसे अलग अलग किस्म की थी, मेरे पास उन दिनों थोड़ी स्टाइलिश साइकिल थी हीरो रेंजर और मेरे दोस्त के पास एटलस की सामान्य साइकिल. हीरो रेंजर टाइप साइकिल का बड़ा क्रेज था उन दिनों और मैंने भी शायद इसी वजह से वो साइकिल लिया था. लेकिन ट्रेडिशनल बड़ी वाली साइकिल ज्यादा कम्फ़र्टेबल लगती थी चलाने में और ज्यादा तेज़ भागती थी. 

अक्सर स्कूल या कोचिंग से घर आते वक़्त मैं अपनी साइकिल दोस्त को दे देता था और खुद उसकी साइकिल चला कर घर आता था. कभी कभी मुझे अफ़सोस भी होता था कि मुझे बड़ी वाली साइकिल ही खरीदनी चाहिए थी. 

साइकिल चलाना भी मैंने बड़ी वाली साइकिल पर ही सीखा था. मामा और भैया ने मुझे साइकिल चलाना सीखाया था. जैसा कि साइकिल चलने की पहली सीढ़ी होती है - हाफ पैडल साइकिल. मुझे भी हाफ पैडल साइकिल चलाना सिखाया गया था. लेकिन मैं कभी इस तरह साइकिल चलाने में कम्फ़र्टेबल हो ही नहीं पाया था. मुझसे साइकिल स्थिर रहती ही नहीं थी. मैंने सीधे सीट पर बैठकर ही साइकिल चलाना सीखा था.  

Traditional Retro Cycle. Image: Team-BHP

अपनी पहली साइकिल जब खरीदने हम शोरूम गए तो पापा ने एक बार कहा था कि बड़ी वाली साइकिल खरीद लो. शायद अन्दर से मेरा मन भी रहा होगा लेकिन हीरो रेंजेर की चमक दमक और उसके स्टाइलिश हैंडल को देखकर मैंने हीरो रेंजेर खरीद लिया था. 

क्या शान से शुरू से एक दो महीने मैंने साइकिल चलाया था. लग रहा था जैसे अपने मर्सिडीज से निकल रहे हों. और हर दिन तीन बार साइकिल की सफाई जरूर होती थी. एक हर दिन सुबह में डीप क्लीनिंग. एकदम रिम तक चमकाया जाता  था ऐसे कि उसमें शक्ल देख सकें. उसके बाद जब निकलना होता था तब एक बार झाड़ पोछ और फिर कहीं से वापस आने के बाद एक बार दोबारा झाड़ पोछ. 

कई बार घर वालों से कमेन्ट भी सुन चुके थे कि नयी साइकिल है न तो ये सब हो रहा है, जैसे जैसे पुरानी होगी वैसे वैसे इसको भूलते भी जाओगे. हुआ भी कुछ ऐसा ही. जैसे जैसे साइकिल पुरानी होती गयी, वैसे वैसे झाड़ने पोछने की फ्रीक्वेंसी भी कम होती गयी. 

हर एक चीज़ का कितना ध्यान रखते थे साइकिल के मामले में. मेरे पास लोहे की सिकड़ी थी जिसे साइकिल को लॉक करने के लिए इस्तेमाल करते थे. फिर उसे बदल कर पी.वी.सी कोटिंग वाली सिकड़ी खरीदी जो ज्यादा अच्छी दिखती थी.  उन दिनों नया नया नंबर लॉक सिस्टम वाला भी लॉक आया था बाज़ार में जो महंगा मिलता था. शायद इस वजह से उसे खरीद नहीं पाया. 

पटना से जब कॉलेज के लिए दुसरे शहर जाना हुआ तब साइकिल भी चलाना मेरा छुट सा गया..अब तो कभी कभी लगता है कितनी आसन ज़िन्दगी थी. एक साइकिल लेकर कहाँ निकल पड़ते थे हम. न पेट्रोल का झंझट और ना ही किसी और चीज़ की टेंसन.

लेकिन एक बात जो मुझे लगती है वो ये है कि उन दिनों साइकिल चलाने का मज़ा इस वजह से भी ज्यादा दुगुना था कि सड़क पर गाड़ियाँ कम चलती थी. जैसा अब ट्रैफिक है वैसा ट्रैफिक उन दिनों नहीं था. अब के समय में तो साइकिल चलाना मेरे ख्याल से मुश्किल काम है. ट्रैफिक तो बढ़ गया ही है और साथ साथ कुछ लोगों के गाड़ी चलाने का ढंग भी बड़ा बदतमीज़ किस्म का हो गया है. 



COMMENTS

BLOGGER: 3
  1. सच कई यादें ताज़ी करा दी आपने
    वो सायकिल वाले दिन अब यादों में है बस

    ReplyDelete
  2. आज के बच्चे जब हार्ली डेविडसन से नीचे बात नहीं करते वहाँ हीरो रेंजर को याद करना, सचमुच यादों की बारात जैसा है! मैंने हालाँकि बहुत कम साइकिल चलाई है, लेकिन पिता जी की साइकिल और उसके हैंडल पर खुदा हुआ उनका नाम आज भी दिलोदिमाग़ पर अंकित है! वही रवानगी तुम्हारी पोस्ट की और वैसा ही अछूता विषय!बहुत सुन्दर!!

    ReplyDelete
आप सब का तहे दिल से शुक्रिया मेरे ब्लॉग पे आने के लिए और टिप्पणियां देने के लिए..कृपया जो कमी है मेरे इस ब्लॉग में मुझे बताएं..आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा...टिप्पणी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..शुक्रिया

Name

A Beautiful Day,17,Audio-Video,12,Ayaansh,3,Bachpan,1,Beautiful Winters,1,Birthdays,1,Blogging,1,Book-Fair,1,College Notes,10,Comments,3,Cycling,2,Delhi Diaries,4,Diary,101,Dobby,1,Durga Puja,1,Durga Puja in New Delhi,1,English Talks,1,Evening Diary,3,Family Notes,32,Flight Stories,1,Friendship Day,1,Good Times,1,Gulzar,3,Heros of India,3,Hobbies,1,Lockdown Diaries,10,My Poems,7,NightOut,3,Nikky,9,Nimisha,8,Nimisha Ki Shaadi,1,Nostalgic Memories,27,Patna Diaries,5,Photo-Gallery,14,Random,16,Togetherness,1,Train Notes,1,अकरम,6,अच्छी बातें,1,अच्छे लोग,11,अमृतसर यात्रा,2,अवि,2,आलेख,4,आशीष भारती,1,इंजीनियरिंग के वे दिन,7,इंटरनेट,2,ऋचा,9,कवितायेँ,7,कहानियां,1,कहानी,1,कार-प्रेम,2,किताबें,1,कुछ पुरानी यादें,24,कुछ पुरानी यादों के नशे में,29,कैफी आज़मी,2,कॉलेज,3,क्रिकेट,2,क्रिकेट वर्ल्ड कप,2,क्लूनी..पिएर्स और अर्नोल्ड,3,गज़ल,4,ग़ालिब,2,गाँव,1,गुलज़ार साहब,3,घूमना फिरना,10,चित्रगुप्त पूजा,1,छठ पूजा,1,जगजीत सिंह,2,जन्मदिन,4,जलियाँवाला बाग,1,टेक्नोलोजी,2,ट्रेन यात्रा,6,तुमसे बना मेरा जीवन,5,त्यौहार,4,दादाजी,1,दिल्ली,2,दिवाली,1,दीप्ति,4,दुर्गा पूजा,1,दोस्तों की दादागिरी,5,निमिषा,6,पटना,41,पन्द्रह अगस्त,2,परिवार,25,परिवार और मित्र,2,पापा-मम्मी,2,पुराने दिन,10,पेंटिंग,1,प्रभात,5,प्रशांत,2,प्रियंका दीदी,3,फराज़,1,फ़िल्मी बातें,4,फेसबुक,2,बच्चों की दुनिया,2,बहन की बातें,14,बेतरतीब ख्याल,28,बेमतलब-लोग,1,बैंगलोर,19,बैंगलोर डायरी,6,ब्लॉग-परिवार,6,ब्सवकल्याण,9,ब्सवकल्याण के किस्से,10,भगत सिंह,2,भगत सिंह के पत्र,1,भाई बहन,4,मती,2,मंदिर,3,मस्ती टाईम,13,माँ,1,माइक्रो पोस्ट,3,माही,1,मुराद,1,मेरा परिचय,1,मेरा शहर बैंगलोर,4,मेरी कविता,6,मेरी डायरी,100,मेरी बहन,12,मेरे अप्लोड्स,3,मेरे दोस्त,37,मेरे विचार,5,मोना,3,मोना की शादी,4,रिया,1,रीती,1,लखनऊ,1,लेखक,1,वरुण,1,संकलित-पत्र,1,सगाई,1,समित,4,सलिल चचा,1,सिंघौल,1,स्तुति,1,स्पोर्ट्स,2,हम-हिन्दी,2,हरिवंशराय बच्चन,1,हंसी-मजाक,3,हाइकू,1,हैदराबाद,2,हॉस्टल के दिन,1,
ltr
item
मेरी बातें : एक साइकिल का दिख जाना और जाने क्या क्या फ़साना माज़ी का याद आना - 2
एक साइकिल का दिख जाना और जाने क्या क्या फ़साना माज़ी का याद आना - 2
Some old memories of cycling and old school days when cycle was most popular
https://1.bp.blogspot.com/-K5SrSEIoh4M/YFV1DiGNSbI/AAAAAAAAfao/ZeP9iYr3PQ4yCAHenvIMnB7Hnfv-4pcsQCLcBGAsYHQ/w640-h480/Cycle%2B003%2BLarge.jpg
https://1.bp.blogspot.com/-K5SrSEIoh4M/YFV1DiGNSbI/AAAAAAAAfao/ZeP9iYr3PQ4yCAHenvIMnB7Hnfv-4pcsQCLcBGAsYHQ/s72-w640-c-h480/Cycle%2B003%2BLarge.jpg
मेरी बातें
https://www.abhishek.cyou/2021/03/nostalgic-memories-of-cycling-old-days-part2.html
https://www.abhishek.cyou/
https://www.abhishek.cyou/
https://www.abhishek.cyou/2021/03/nostalgic-memories-of-cycling-old-days-part2.html
true
174319125135752653
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content